7 नो-बॉल नियम तुलना: फैसला साफ
क्रिकेट में नो-बॉल वह अमान्य डिलीवरी है जिस पर गेंदबाजी करने वाली टीम को दंड मिलता है और बल्लेबाजी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के नियमों और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में...
7 नो-बॉल नियम तुलना: फैसला साफ
क्रिकेट में नो-बॉल वह अमान्य डिलीवरी है जिस पर गेंदबाजी करने वाली टीम को दंड मिलता है और बल्लेबाजी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के नियमों और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इसका निर्णय मैदानी अंपायर करता है, जबकि भारतीय क्रिकेट में बीसीसीआई प्रतियोगिताएं इन्हीं मूल सिद्धांतों का पालन करती हैं। फ्रंट-फुट का क्रीज से आगे जाना, कमर से ऊपर की फुल टॉस, खतरनाक बाउंसर और गलत क्षेत्ररक्षण इसके प्रमुख कारण हैं। नो-बॉल पर गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती, और एकदिवसीय तथा ट्वेंटी-20 क्रिकेट में अगली डिलीवरी सामान्यतः फ्री-हिट होती है। हालांकि नियम प्रारूप और प्रतियोगिता के अनुसार थोड़ा बदल सकते हैं। सबसे सुरक्षित तरीका है: अंपायर का संकेत देखें, स्कोरबोर्ड पर अतिरिक्त रन जांचें और फ्री-हिट को पिछली गेंद का हिस्सा न समझें।

क्रिकेट में नो-बॉल केवल “एक अतिरिक्त रन” नहीं है; यह गेंद की वैधता, ओवर की गिनती, बल्लेबाज के आउट होने और अगले शॉट की रणनीति को एक साथ प्रभावित करती है। मैच डे क्रिकेट पर इस विषय को समझने का सबसे अच्छा तरीका है कि हर स्थिति को अलग देखा जाए, क्योंकि फ्रंट-फुट नो-बॉल और कमर से ऊपर की फुल टॉस का परिणाम समान नहीं होते। मसलन, नो-बॉल पर बल्लेबाज के बल्ले से लगे चार रन बल्लेबाज के खाते में जाते हैं, जबकि नो-बॉल का मूल दंड अतिरिक्त रन के रूप में दर्ज होता है। गेंद वाइड भी हो सकती है, बाउंड्री तक जा सकती है या बल्लेबाज के शरीर से टकरा सकती है; तब कुल रन अलग-अलग घटकों में बांटे जाते हैं। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के क्रिकेट नियम आधिकारिक आधार देते हैं, लेकिन प्रतियोगिता की खेल-शर्तें अंतिम संदर्भ होती हैं। क्या आप सचमुच हर स्थिति को एक ही तरह मानते हैं? यही गलती अक्सर देखने वालों से होती है।
चरण 1: नो-बॉल की पहचान कैसे करें?
नो-बॉल की पहचान मुख्यतः गेंदबाज के पैर, गेंद की ऊंचाई, गेंदबाजी की दिशा और क्षेत्ररक्षकों की स्थिति से होती है। अंपायर हाथ को क्षैतिज रूप से फैलाकर नो-बॉल का संकेत देता है, जिसके बाद स्कोरर कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन दर्ज करता है। यह संकेत वाइड से अलग है, इसलिए दोनों को मिलाना नहीं चाहिए।
फ्रंट-फुट नियम
गेंद छोड़ते समय गेंदबाज का अगला पैर पॉपिंग क्रीज के पीछे होना चाहिए और उसका कुछ भाग रिटर्न क्रीज के भीतर भी रहना चाहिए। यदि अगला पैर पूरी तरह क्रीज के आगे चला जाता है, तो यह फ्रंट-फुट नो-बॉल है। गेंदबाज का पिछला पैर रिटर्न क्रीज के बाहर नहीं पड़ना चाहिए; यह नियम तेज और स्पिन दोनों गेंदबाजों पर लागू होता है। कैमरा कोण, क्रीज की सफेद रेखा और पैर का जमीन से संपर्क निर्णय में महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए हर करीबी मामले में तीसरे अंपायर की भूमिका बढ़ जाती है।
एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक अंतर यह है कि गेंदबाज का पैर हवा में आगे निकलने से अपने-आप नो-बॉल नहीं बनता; निर्णायक क्षण जमीन पर पैर का संपर्क और क्रीज के संबंध से जुड़ा है। टीवी प्रसारण में “फ्रंट-फुट नो-बॉल” की जांच कई फ्रेम में होती है, जबकि स्थानीय क्रिकेट में अंपायर को तुरंत निर्णय लेना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियम और खेल-शर्तें प्रतियोगिता-विशेष बदलावों का संदर्भ देती हैं। इसलिए स्कोरबोर्ड पर केवल “नो” देखकर निष्कर्ष न निकालें; अतिरिक्त रन, गेंद संख्या और अंपायर संकेत तीनों की पुष्टि करें। क्रिकेट अंपायर संकेतों की पूरी मार्गदर्शिका
गेंद की ऊंचाई से जुड़ी नो-बॉल
कमर से ऊपर की फुल टॉस, जिसे आम बोलचाल में बीमर कहा जाता है, बल्लेबाज के लिए खतरनाक मानी जाती है। यदि गेंद बिना टप्पा खाए बल्लेबाज की कमर की ऊंचाई से ऊपर निकलती है, तो सामान्यतः नो-बॉल दी जाती है। यहां माप बल्लेबाज के खड़े होने की स्थिति पर आधारित होता है, इसलिए क्रीज से आगे बढ़े बल्लेबाज की स्थिति निर्णय को प्रभावित कर सकती है।
गेंद टप्पा खाने के बाद बल्लेबाज के सिर या कंधे के ऊपर पहुंचती है, तो मामला बाउंसर नियमों से जुड़ता है, न कि हमेशा बीमर से। पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक ओवर में अनुमत बाउंसरों की संख्या खेल-शर्तों पर निर्भर कर सकती है; टेस्ट, एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 में सीमाएं अलग हो सकती हैं। महिला क्रिकेट और घरेलू प्रतियोगिताओं में भी अलग प्रावधान संभव हैं। यही वह बारीकी है जिसे सामान्य लेख अक्सर छोड़ देते हैं: “कंधे से ऊपर” और “कमर से ऊपर बिना टप्पे” एक ही नियम नहीं हैं।
चरण 2: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?
नो-बॉल गेंदबाजी की वैधता से जुड़ी गलती है, जबकि वाइड ऐसी गेंद है जो बल्लेबाज की सामान्य पहुंच से बाहर जाती है और निर्धारित दिशा या ऊंचाई के कारण खेल योग्य नहीं मानी जाती। दोनों पर कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती, लेकिन नो-बॉल पर फ्री-हिट का प्रावधान सामान्यतः लागू होता है, वाइड पर नहीं।
नो-बॉल का मूल दंड गेंदबाजी टीम पर लगाया जाता है, इसलिए उसका अतिरिक्त रन “नो-बॉल एक्स्ट्रा” के रूप में दर्ज होता है। यदि बल्लेबाज उस गेंद पर चौका लगाता है, तो कुल 5 रन बन सकते हैं: 1 नो-बॉल रन और 4 बल्लेबाज के खाते में। यदि गेंद बल्ले से नहीं लगी और बल्लेबाज दौड़कर 2 रन लेता है, तो कुल 3 रन नो-बॉल खाते में जा सकते हैं, प्रतियोगिता के स्कोरिंग नियम के अनुसार। दूसरी ओर, वाइड पर दौड़े गए रन वाइड खाते में जुड़ते हैं।
यहां एक और भ्रम दूर करना जरूरी है: नो-बॉल और वाइड एक ही डिलीवरी पर सामान्यतः एक साथ नहीं दिए जाते, क्योंकि अंपायर पहले उस गेंद की मुख्य अवैधता तय करता है। यदि गेंद बल्लेबाज के शरीर से लगकर चली जाए, तो लेग-बाय या बाई के नियम लागू हो सकते हैं; लेकिन नो-बॉल का 1 रन फिर भी अलग आधार बना रहता है। क्रिकेट स्कोरिंग और अतिरिक्त रनों की जानकारी देखते समय “अतिरिक्त” कॉलम को खोलकर पढ़िए, केवल कुल स्कोर देखना पर्याप्त नहीं है।
- नो-बॉल: कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन और सामान्यतः फ्री-हिट।
- वाइड: कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन, पर सामान्यतः फ्री-हिट नहीं।
- दोनों: गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती।
- बल्लेबाज के बल्ले से रन: नो-बॉल में बल्लेबाज के खाते में दर्ज हो सकते हैं।
मैच समीक्षा करते समय इस अंतर का रणनीतिक महत्व भी है। वाइड गेंद पर बल्लेबाज अक्सर रन चुराने की कोशिश करता है, जबकि नो-बॉल के बाद अगली गेंद पर फ्री-हिट होने से गेंदबाज की लाइन, लंबाई और क्षेत्ररक्षण तुरंत बदलना पड़ता है। अंपायर की आवाज, हाथ का संकेत और प्रसारण ग्राफिक्स को एक साथ पढ़ना सबसे विश्वसनीय तरीका है। क्या केवल स्कोरबोर्ड की एक छोटी संख्या देखकर निर्णय करना समझदारी है? बिल्कुल नहीं।
अब रन-गणना और फ्री-हिट का संबंध स्पष्ट करें, क्योंकि यहीं सबसे अधिक भ्रम पैदा होता है।
चरण 3: रन, आउट और फ्री-हिट का हिसाब
नो-बॉल पर बल्लेबाज को कई प्रकार से रन मिल सकते हैं, लेकिन गेंद की अवैधता समाप्त नहीं होती। गेंद बल्ले से लगकर सीमा पार करे, शरीर से टकराकर रन बने या बल्लेबाज बिना संपर्क के दौड़े—हर स्थिति का स्कोरिंग परिणाम अलग हो सकता है। इसलिए कुल रन को “नो-बॉल रन”, “बल्लेबाज के रन”, “बाई” और “लेग-बाई” में विभाजित करके देखना चाहिए।
नो-बॉल पर कौन-से आउट संभव हैं?
नो-बॉल पर बल्लेबाज को सामान्यतः बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंप्ड नहीं दिया जा सकता। हालांकि रन-आउट, हिट-द-विकेट की कुछ विशेष परिस्थितियां, गेंद को दो बार मारना, क्षेत्ररक्षण में बाधा डालना और कुछ अन्य दुर्लभ आउट नियम लागू हो सकते हैं। नियमों की भाषा जटिल है, इसलिए “नो-बॉल पर बल्लेबाज कभी आउट नहीं हो सकता” कहना गलत है।
सबसे आम अपवाद रन-आउट है। यदि बल्लेबाज रन लेने के प्रयास में क्रीज से बाहर है और क्षेत्ररक्षक विकेट गिरा देता है, तो नो-बॉल होने के बावजूद रन-आउट दिया जा सकता है। इसी तरह नॉन-स्ट्राइकर का क्रीज से बाहर निकलना भी संबंधित रन-आउट नियम के अधीन आता है। मांकडिंग शब्द के बजाय आधिकारिक रन-आउट प्रावधान देखना बेहतर है, क्योंकि एमसीसी नियम 38 इसके लिए अधिक सटीक संदर्भ देता है।
फ्री-हिट कब मिलती है?
एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट में नो-बॉल के बाद अगली डिलीवरी सामान्यतः फ्री-हिट होती है। टेस्ट क्रिकेट में फ्री-हिट का प्रावधान आम तौर पर नहीं होता, जब तक किसी विशेष प्रतियोगिता की खेल-शर्तें अलग न कहें। यदि नो-बॉल के बाद वाली गेंद भी नो-बॉल या वाइड हो जाए, तो फ्री-हिट अगली वैध गेंद तक जारी रहती है।
फ्री-हिट का अर्थ यह नहीं है कि बल्लेबाज हर प्रकार से सुरक्षित है। रन-आउट, स्टंपिंग जैसी स्थिति जब बल्लेबाज क्रीज से बाहर निकल चुका हो, या नियमों में अनुमत अन्य आउट अभी भी संभव हो सकते हैं। साथ ही, फ्री-हिट डिलीवरी पर क्षेत्ररक्षण पूरी तरह मनमाने ढंग से नहीं बदला जा सकता; कप्तान को निर्धारित क्षेत्ररक्षण सीमाओं का पालन करना पड़ता है। यह सूचना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ गेंदबाज फ्री-हिट पर धीमी गेंद या यॉर्कर चुनते हैं, जबकि बल्लेबाज पहले से तय शॉट खेलने के दबाव में आ सकता है।

चरण 4: अंपायर का निर्णय कैसे जांचें?
अंपायर का निर्णय नो-बॉल में अंतिम नहीं माना जाता यदि संबंधित खेल-शर्तें तीसरे अंपायर या निर्णय समीक्षा प्रणाली की अनुमति देती हों। फ्रंट-फुट नो-बॉल की जांच के लिए प्रसारण कैमरा और तकनीकी रिप्ले उपयोगी होते हैं, जबकि कमर की ऊंचाई, बाउंसर और खतरनाक गेंदों का फैसला अक्सर मैदानी अंपायर के आकलन पर निर्भर रहता है।
निर्णय समीक्षा में क्या देखें?
पहले गेंद संख्या देखें: नो-बॉल होने पर डिलीवरी ओवर में नहीं गिनी जाती। दूसरा, स्कोरकार्ड के अतिरिक्त रनों में नो-बॉल जोड़ की पुष्टि करें। तीसरा, अगली गेंद के पास फ्री-हिट का चिह्न देखें, यदि मैच एकदिवसीय या ट्वेंटी-20 प्रारूप का है। चौथा, यह जांचें कि बल्लेबाज के खाते में बने रन और अतिरिक्त रन अलग-अलग दर्ज हैं।
करीबी फ्रंट-फुट मामलों में रिप्ले के दौरान पॉपिंग क्रीज की रेखा और गेंदबाज के पैर का जमीन से संपर्क देखना चाहिए। यदि गेंदबाज का पैर रेखा पर है, तो निर्णय के लिए प्रतियोगिता की व्याख्या और तकनीकी प्रमाण महत्वपूर्ण हो सकते हैं; सफेद रेखा को पूरी तरह पार करना और रेखा को छूना एक जैसा नहीं माना जाता। यही कारण है कि सीमित ओवरों के शीर्ष स्तर के मैचों में तीसरा अंपायर नो-बॉल निगरानी करता है। इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड के आधिकारिक नियम संसाधन भी खेल-शर्तों और प्रतियोगिता-विशेष प्रावधानों को अलग-अलग देखने की सलाह देते हैं।
दर्शक और स्कोरर की जांच-सूची
- अंपायर का एक हाथ क्षैतिज रूप से फैला है या नहीं।
- स्कोरबोर्ड पर गेंद संख्या बढ़ी है या नहीं।
- अतिरिक्त रनों में नो-बॉल जुड़ी है या नहीं।
- अगली गेंद के साथ फ्री-हिट संकेत है या नहीं।
- बल्लेबाज के रन और टीम के कुल रन में अंतर क्या है।
- रिप्ले में पैर का संपर्क और क्रीज की स्थिति साफ है या नहीं।
यह प्रक्रिया केवल दर्शकों के लिए नहीं है। स्थानीय क्लब, स्कूल क्रिकेट और ऑनलाइन मैच समीक्षा में स्कोरर को हर नो-बॉल के बाद ओवर की वैध गेंदों की संख्या फिर से गिननी चाहिए। छह डिलीवरी का ओवर छह कानूनी गेंदों से पूरा होता है, छह प्रयासों से नहीं। उदाहरण के लिए, दो नो-बॉल और चार वैध गेंदों के बाद ओवर अभी समाप्त नहीं हुआ; दो वैध गेंदें बाकी रहेंगी। यह साधारण-सी गणना गलती से पूरे स्कोरकार्ड को बिगाड़ सकती है।
अब उन मामलों पर आइए जहां गलती अक्सर तकनीकी से अधिक परिचालनात्मक होती है।
चरण 5: नियमों की अंतिम पुष्टि कैसे करें?
नो-बॉल के नियमों की अंतिम पुष्टि हमेशा प्रतियोगिता की आधिकारिक खेल-शर्तों, मैदानी अंपायर के संकेत और विश्वसनीय स्कोरकार्ड से करनी चाहिए। एमसीसी के मूल कानून आधार देते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ट्वेंटी-20, एकदिवसीय, टेस्ट, घरेलू क्रिकेट और जूनियर क्रिकेट में बाउंसर, बीमर, फ्री-हिट तथा तकनीकी समीक्षा से जुड़े प्रावधान अलग हो सकते हैं।
एक उपयोगी तुलना इस प्रकार है:
| स्थिति | सामान्य निर्णय | अतिरिक्त प्रभाव |
|---|---|---|
| फ्रंट-फुट क्रीज से आगे | नो-बॉल | 1 अतिरिक्त रन, गेंद दोबारा |
| कमर से ऊपर बिना टप्पे की गेंद | नो-बॉल | सुरक्षा नियम, प्रारूप के अनुसार कार्रवाई |
| अनुमत सीमा से अधिक बाउंसर | नो-बॉल | फ्री-हिट, यदि प्रारूप में लागू |
| नो-बॉल के बाद अगली गेंद | वैध होने पर फ्री-हिट | एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 में सामान्य |
| नो-बॉल पर रन-आउट | आउट संभव | गेंद फिर भी ओवर में नहीं गिनी जाती |
| नो-बॉल पर कैच | सामान्यतः आउट नहीं | खेल-शर्तों और विशेष अपवाद जांचें |
एक कम चर्चित बिंदु यह है कि खतरनाक या जानबूझकर गलत गेंदबाजी पर केवल नो-बॉल पर्याप्त दंड नहीं हो सकता। अंपायर चेतावनी, क्षेत्ररक्षण कप्तान को सूचना या गेंदबाज को आक्रमण से हटाने जैसी कार्रवाई कर सकता है, विशेषकर जब गेंद बल्लेबाज की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करे। युवा क्रिकेट में ऊंचाई और बाउंसर से जुड़े नियम और भी कठोर हो सकते हैं। इसलिए किसी पेशेवर मैच का नियम सीधे गली या जूनियर क्रिकेट पर लागू करना जोखिमपूर्ण है। नियम पढ़ना उबाऊ लग सकता है, पर गलत सलाह देने से बेहतर यही है, है न?
क्रिकेट में वाइड, बाई और लेग-बाई का अंतर
सामान्य समस्याओं का समाधान
नो-बॉल समझने में सबसे बड़ी समस्या नियमों की कमी नहीं, बल्कि अलग-अलग प्रारूपों को एक ही नियम मान लेना है। कोई दर्शक टेस्ट मैच में फ्री-हिट खोजता है, कोई वाइड को नो-बॉल समझता है, और कोई बीमर तथा बाउंसर को एक ही श्रेणी में रख देता है। इन गलतियों को दूर करने के लिए पहले प्रारूप लिखें, फिर गेंद की स्थिति, फिर अंपायर संकेत और अंत में स्कोरकार्ड देखें।
समस्या: नो-बॉल दी गई, फिर भी फ्री-हिट नहीं दिखी
पहले यह जांचें कि मैच टेस्ट क्रिकेट तो नहीं था। फ्री-हिट का प्रावधान सामान्यतः एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 में लागू होता है, जबकि टेस्ट में आमतौर पर नहीं। इसके बाद देखें कि प्रसारण ग्राफिक्स ने संकेत देर से दिखाया या तकनीकी विलंब हुआ। स्थानीय टूर्नामेंट में आयोजक की खेल-शर्तें अंतिम प्रमाण हो सकती हैं।
समस्या: नो-बॉल पर बल्लेबाज कैच आउट दिखा
यदि गेंद नो-बॉल थी और बल्लेबाज ने शॉट खेलकर कैच दिया, तो सामान्य नियमों के अनुसार कैच आउट नहीं दिया जाता। हालांकि कैच के बाद बल्लेबाज या साथी बल्लेबाज रन-आउट हो सकते हैं, यदि वे क्रीज से बाहर हों और रन का प्रयास कर रहे हों। स्कोरर को नो-बॉल रन, पूरे हुए रन और आउट होने के सही तरीके को अलग-अलग दर्ज करना चाहिए।
समस्या: ओवर छह गेंदों के बाद भी जारी है
नो-बॉल और वाइड वैध गेंदें नहीं हैं, इसलिए वे ओवर की छह गेंदों में नहीं जुड़तीं। यदि किसी ओवर में एक नो-बॉल और एक वाइड हुई, तो छह वैध गेंदें पूरी करने के लिए कुल आठ डिलीवरी तक लग सकती हैं। स्कोरबुक में हर डिलीवरी के सामने वैध या अवैध चिह्न लगाना इस गलती को रोकने का सबसे सरल तरीका है।
समस्या: कमर और कंधे की ऊंचाई पर भ्रम
बिना टप्पे की गेंद कमर से ऊपर हो तो बीमर और नो-बॉल का प्रश्न उठता है; टप्पे के बाद सिर या कंधे के ऊपर जाने वाली गेंद बाउंसर नियमों से जुड़ती है। बल्लेबाज का खड़ा होना, गेंद की प्रक्षेपवक्र और प्रारूप की सीमा तीनों देखे जाने चाहिए। केवल दर्शक की आंख से ऊंचाई नापना विश्वसनीय नहीं है।

निष्कर्ष: नो-बॉल को एक संकेत नहीं, पूरी प्रक्रिया समझें
क्रिकेट में नो-बॉल के नियम समझने के लिए चार चीजें याद रखें: गेंदबाज का पैर, गेंद की ऊंचाई, ओवर की वैध गेंदें और अगली डिलीवरी का प्रारूप। एक सामान्य नो-बॉल पर कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है, गेंद फिर से फेंकी जाती है और एकदिवसीय तथा ट्वेंटी-20 में अक्सर फ्री-हिट आती है। फिर भी बीमर, बाउंसर, रन-आउट और क्षेत्ररक्षण से जुड़े अपवादों को अनदेखा करना खतरनाक है। मैच डे क्रिकेट पर किसी निर्णय को जांचते समय एमसीसी नियम, आईसीसी खेल-शर्तें, अंपायर संकेत और स्कोरकार्ड को साथ पढ़ें। यही तरीका अनुमान, सोशल मीडिया की अधूरी जानकारी और गलत कमेंट्री से बचाता है। आखिर नियम का उद्देश्य बहस बढ़ाना नहीं, खेल को निष्पक्ष और सुरक्षित रखना है।
यदि आप क्रिकेट के निर्णयों और रणनीति को अधिक स्पष्ट रूप से समझना चाहते हैं, तो यह अगला उपयोगी कदम है।
क्रिकेट के सभी प्रमुख नियमों की संदर्भ मार्गदर्शिका
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्रिकेट में नो-बॉल क्या होती है?
उत्तर: नो-बॉल वह अमान्य गेंद है जो गेंदबाज द्वारा निर्धारित नियमों के विरुद्ध फेंकी जाती है। इसके लिए गेंदबाजी टीम पर सामान्यतः 1 अतिरिक्त रन का दंड लगता है और गेंद ओवर की वैध छह गेंदों में नहीं गिनी जाती। फ्रंट-फुट का क्रीज से आगे जाना, कमर से ऊपर की बिना टप्पे वाली फुल टॉस और कुछ खतरनाक बाउंसर इसके सामान्य कारण हैं। प्रारूप के अनुसार अगली गेंद फ्री-हिट भी हो सकती है।
प्रश्न: नो-बॉल पर कितने रन मिलते हैं?
उत्तर: नो-बॉल पर कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है, लेकिन कुल रन इससे अधिक हो सकते हैं। यदि बल्लेबाज चौका लगाता है, तो टीम को सामान्यतः 5 रन मिलते हैं—1 नो-बॉल रन और 4 बल्लेबाज के खाते में। यदि गेंद बल्ले से नहीं लगी और अतिरिक्त दौड़ पूरी हुई, तो वे रन नो-बॉल खाते में जा सकते हैं। अंतिम विभाजन आधिकारिक स्कोरिंग नियमों पर निर्भर करता है।
प्रश्न: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?
उत्तर: नो-बॉल गेंद की वैधता या गेंदबाज की तकनीकी गलती से जुड़ी होती है, जबकि वाइड बल्लेबाज की पहुंच से बाहर जाने वाली गेंद है। दोनों पर कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद दोबारा फेंकी जाती है। एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 में नो-बॉल के बाद सामान्यतः फ्री-हिट मिलती है, लेकिन वाइड के बाद नहीं। इसलिए दोनों को स्कोरकार्ड में अलग-अलग दर्ज किया जाता है।
प्रश्न: नो-बॉल के बाद फ्री-हिट कब मिलती है?
उत्तर: एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट में नो-बॉल के बाद अगली गेंद सामान्यतः फ्री-हिट होती है। टेस्ट क्रिकेट में फ्री-हिट आम तौर पर लागू नहीं होती, जब तक प्रतियोगिता की विशेष खेल-शर्तें अलग प्रावधान न दें। यदि अगली डिलीवरी भी नो-बॉल या वाइड हो, तो फ्री-हिट अगली वैध गेंद तक जारी रह सकती है। फ्री-हिट पर रन-आउट जैसे कुछ आउट संभव रहते हैं।
प्रश्न: क्या नो-बॉल पर बल्लेबाज आउट हो सकता है?
उत्तर: नो-बॉल पर बल्लेबाज सामान्यतः बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंप्ड नहीं हो सकता। हालांकि रन-आउट, क्षेत्ररक्षण में बाधा और कुछ विशेष नियमों के तहत आउट संभव है। उदाहरण के लिए, बल्लेबाज रन लेने के दौरान क्रीज से बाहर हो और क्षेत्ररक्षक विकेट गिरा दे, तो रन-आउट दिया जा सकता है। इसलिए “नो-बॉल पर कोई आउट नहीं” कहना पूरी तरह सही नहीं है।
प्रश्न: नो-बॉल ओवर की गेंदों में क्यों नहीं गिनी जाती?
उत्तर: नो-बॉल अवैध डिलीवरी है, इसलिए वह ओवर की छह वैध गेंदों में शामिल नहीं होती। यदि गेंदबाज ने चार वैध गेंदों के बीच दो नो-बॉल फेंकी हैं, तो ओवर पूरा करने के लिए अभी दो वैध गेंदें बाकी रहेंगी। इसी कारण एक ओवर में छह से अधिक डिलीवरी हो सकती हैं। स्कोरर को हर गेंद को वैध या अवैध चिह्न से अलग दर्ज करना चाहिए।
प्रश्न: कमर से ऊपर की गेंद हमेशा नो-बॉल होती है?
उत्तर: बिना टप्पे की गेंद यदि बल्लेबाज की कमर से ऊपर पहुंचती है, तो सामान्यतः उसे नो-बॉल माना जाता है। टप्पा खाने के बाद सिर या कंधे के ऊपर जाने वाली गेंद बाउंसर नियमों के तहत आ सकती है, जो अलग विषय है। बल्लेबाज की स्थिति, गेंद की प्रक्षेपवक्र और मैच प्रारूप निर्णय को प्रभावित करते हैं। जूनियर, महिला और घरेलू क्रिकेट की सीमाएं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अलग हो सकती हैं।