क्रिकेट नियम: 5 बदलाव 2026 में
क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए समझने का सबसे आसान तरीका है खेल को गेंद, रन, विकेट और ओवर के चार आधारों में देखना। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी क्रिकेट के वैश्विक नियमों और खेल परिस्थि...
क्रिकेट नियम: 5 बदलाव 2026 में
क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए समझने का सबसे आसान तरीका है खेल को गेंद, रन, विकेट और ओवर के चार आधारों में देखना। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी क्रिकेट के वैश्विक नियमों और खेल परिस्थितियों का प्रमुख संस्थागत संदर्भ है, जबकि मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के नियम क्रिकेट की मूल विधि समझाते हैं। एक सामान्य सीमित ओवर मैच में प्रत्येक टीम को 20 या 50 ओवर मिलते हैं और एक ओवर में छह वैध गेंदें होती हैं। बल्लेबाज रन दौड़कर, चौका या छक्का लगाकर बनाता है; गेंदबाज विकेट लेकर पारी रोकता है। 2026 में भी नो-बॉल, वाइड, रन आउट और निर्णय समीक्षा प्रणाली जैसे नियम समझना जरूरी है। शुरुआत में स्कोरकार्ड पर रन, विकेट और ओवर की स्थिति देखें, फिर गेंद-दर-गेंद घटनाओं को पढ़ें—यही सबसे सुरक्षित सीखने का तरीका है।

क्रिकेट बाहर से कठिन दिखता है, लेकिन इसकी बुनियाद आश्चर्यजनक रूप से व्यवस्थित है। दो टीमें खेलती हैं, एक टीम बल्लेबाजी करती है और दूसरी गेंदबाजी तथा क्षेत्ररक्षण; फिर भूमिकाएं बदलती हैं। बल्लेबाजी करने वाली टीम का लक्ष्य विरोधी टीम से अधिक रन बनाना होता है, जबकि क्षेत्ररक्षण टीम रन रोकने और 10 विकेट लेने का प्रयास करती है। क्या आप केवल छक्के और चौके देखकर मैच समझने की कोशिश कर रहे हैं? यह अधूरा तरीका है, क्योंकि एक रन लेने से स्ट्राइक बदल सकती है, एक नो-बॉल अतिरिक्त रन दे सकती है और एक विकेट पूरी रणनीति बदल सकता है। मैच डे क्रिकेट पर मैच समीक्षा, खिलाड़ी आंकड़े, आईपीएल कवरेज तथा बल्लेबाजी और गेंदबाजी रणनीति पढ़ते समय इन मूल नियमों को आधार बनाइए। शुरुआती क्रिकेट शब्दावली
अधिक स्पष्ट उदाहरण और नियमों का संक्षिप्त संदर्भ देखना हो तो यहां से शुरुआत करें।
क्रिकेट स्कोरकार्ड कैसे पढ़ें
मिथक 1: हर गेंद पर एक रन लेना जरूरी है—क्या यह सच है?
नहीं, क्रिकेट में हर गेंद पर रन लेना अनिवार्य नहीं है। बल्लेबाज गेंद छोड़ सकता है, रक्षात्मक शॉट खेल सकता है या रन बनाने का प्रयास कर सकता है; रन केवल तब जुड़ते हैं जब बल्लेबाज दौड़कर क्रीज बदलते हैं या गेंद सीमा रेखा तक पहुंचती है। वैध ओवर छह गेंदों से पूरा होता है, चाहे उन गेंदों पर कोई रन न बना हो।
सबसे पहले गेंद की वैधता समझिए। यदि गेंदबाज की गेंद पर बल्लेबाज कोई रन नहीं बनाता, तो स्कोर में उस गेंद के लिए शून्य जुड़ता है, लेकिन गेंद फिर भी ओवर की छह गेंदों में गिनी जाती है। इसके विपरीत नो-बॉल और वाइड वैध गेंद नहीं मानी जातीं, इसलिए गेंदबाज को अतिरिक्त गेंद डालनी पड़ती है। यह छोटा अंतर स्कोरकार्ड में बड़ा प्रभाव डालता है, isn’t that the point? शुरुआती दर्शक अक्सर 0, 1, 4 और 6 को ही देखते हैं, जबकि डॉट गेंदें दबाव बनाने का महत्वपूर्ण साधन हैं। Source: मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के नियम
रणनीति के स्तर पर टेस्ट क्रिकेट, एकदिवसीय क्रिकेट और टी20 क्रिकेट अलग दिखते हैं। टेस्ट मैच में पारी और समय का महत्व अधिक होता है, एकदिवसीय मैच में 50 ओवर की सीमा रहती है और टी20 में प्रत्येक टीम को 20 ओवर मिलते हैं। उदाहरण के लिए, विराट कोहली का रक्षात्मक शॉट टेस्ट मैच में उपयोगी हो सकता है, जबकि सूर्यकुमार यादव जैसा आक्रामक बल्लेबाज टी20 में जोखिम लेकर रन गति बढ़ा सकता है। फिर भी मूल नियम समान रहते हैं: विकेट सुरक्षित रखें, वैध गेंदों का सामना करें और उपलब्ध रन का आकलन करें।
मिथक 2: नो-बॉल पर केवल एक अतिरिक्त रन मिलता है—क्या यह आधा सच है?
नो-बॉल पर सामान्यतः एक अतिरिक्त रन मिलता है, लेकिन अंतिम स्कोर केवल एक रन तक सीमित नहीं रहता। बल्लेबाज उस गेंद से रन बना सकता है, गेंद सीमा पार कर सकती है और कुछ प्रारूपों में अगली गेंद फ्री हिट हो सकती है। इसलिए नो-बॉल को दंड और रणनीतिक अवसर दोनों के रूप में देखना चाहिए।
नो-बॉल के कई कारण हो सकते हैं: गेंदबाज का फ्रंट पैर क्रीज की सीमा से आगे जाना, कमर से ऊपर की खतरनाक फुल टॉस या क्षेत्ररक्षण नियमों का उल्लंघन। सीमित ओवर क्रिकेट में नो-बॉल के बाद आने वाली फ्री हिट पर बल्लेबाज सामान्यतः बोल्ड, कैच या एलबीडब्ल्यू से आउट नहीं होता, हालांकि रन आउट, स्टंपिंग और हिट-द-विकेट जैसी स्थितियां अलग नियमों के अंतर्गत लागू हो सकती हैं। यह वह बारीकी है जिसे सामान्य शुरुआती लेख अक्सर छोड़ देते हैं। यदि स्कोरबोर्ड पर 3 नो-बॉल दिखें, तो कम-से-कम 3 अतिरिक्त रन जुड़े हैं, लेकिन बल्लेबाज के शॉट से कुल बढ़त इससे कहीं अधिक हो सकती है।
वाइड गेंद भी अतिरिक्त रन देती है, पर उसका उद्देश्य और गणना अलग होती है। गेंद बल्लेबाज की सामान्य पहुंच से इतनी बाहर हो कि वह वैध शॉट नहीं खेल सके, तो अंपायर वाइड दे सकता है; गेंद सीमा तक चली जाए तो अतिरिक्त रन बढ़ जाते हैं। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के आधिकारिक नियमों में वाइड और नो-बॉल को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है, इसलिए दोनों को एक जैसा मानना खतरनाक भ्रम है। नो-बॉल और वाइड का पूरा अंतर
नियमों को स्कोरबोर्ड के उदाहरण से समझना अधिक उपयोगी है। मान लीजिए गेंदबाज ने नो-बॉल की, बल्लेबाज ने दो रन दौड़े और गेंद सीमा तक चली गई; प्रसारण में दिखाई देने वाली अंतिम गणना परिस्थितियों के अनुसार पांच या अधिक रन हो सकती है, इसलिए केवल “एक अतिरिक्त” देखकर निर्णय न लें। अंपायर का संकेत, गेंद की स्थिति और आधिकारिक स्कोरकार्ड तीनों मिलाकर देखें। क्या आप केवल कमेंटेटर की पहली घोषणा पर भरोसा करेंगे, या am I wrong? सुरक्षित तरीका हमेशा आधिकारिक स्कोरकार्ड से पुष्टि करना है।
मिथक 3: कैच पकड़ते ही बल्लेबाज हमेशा आउट होता है—यह पूरी तरह गलत है
कैच तभी वैध आउट होता है जब गेंद बल्ले या बल्ले को पकड़े हुए हाथ से निकले और क्षेत्ररक्षक गेंद को जमीन छूने से पहले नियंत्रित रूप से पकड़ ले। सीमा रेखा के पास क्षेत्ररक्षक का संतुलन, गेंद पर नियंत्रण और बाउंड्री कुशन से संपर्क निर्णायक होते हैं। इसलिए हर दिखाई देने वाला कैच स्वतः आउट नहीं माना जाता।
कैच के लिए तीन जांच जरूरी हैं: क्या गेंद ने बल्ले को छुआ, क्या क्षेत्ररक्षक ने गेंद को जमीन से पहले पकड़ा, और क्या पकड़ के दौरान उसका शरीर सीमा रेखा से बाहर तो नहीं गया। यदि बल्लेबाज के दस्ताने पर गेंद लगती है और दस्ताना बल्ले को पकड़े हुए है, तो कैच की स्थिति बन सकती है; लेकिन केवल शरीर या ढीले दस्ताने से लगने पर निर्णय अलग हो सकता है। कैच पूरा होने के बाद गेंद नियंत्रण में रहनी चाहिए। आईसीसी के खेल नियम और वीडियो समीक्षा अधिकारी इन्हीं बिंदुओं पर ध्यान देते हैं। Source: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद
एक महत्वपूर्ण किनारा “कैच के बाद टकराव” है। यदि क्षेत्ररक्षक गेंद पकड़ने के बाद गिरता है, पर गेंद पर नियंत्रण बना रहता है, तो आउट दिया जा सकता है; यदि गेंद जमीन छूती है या नियंत्रण टूटता है, तो बल्लेबाज बच सकता है। सीमा रेखा पर छह रन और कैच के बीच का अंतर भी क्षेत्ररक्षक की स्थिति पर निर्भर करता है। 2023 में लागू कैचिंग और बाउंड्री संबंधी चर्चाओं के बाद प्रसारण तकनीक ने इन मामलों को अधिक स्पष्ट बनाया, पर दर्शक को धीमी गति के हर दृश्य को अंतिम प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
डीआरएस, स्निकोमीटर और अल्ट्राएज जैसे उपकरण निर्णय समीक्षा में सहायता करते हैं, लेकिन उनका उपयोग प्रारूप और प्रतियोगिता के नियमों पर निर्भर करता है। सभी स्थानीय मैचों में डीआरएस उपलब्ध नहीं होता। यदि अंपायर का निर्णय चुनौती योग्य हो, तो कप्तान को समीक्षा मांगने से पहले समय सीमा और उपलब्ध समीक्षाओं की संख्या देखनी चाहिए। टी20 लीग, भारत में आईपीएल और आईसीसी प्रतियोगिताओं में प्रक्रियाएं समान दिख सकती हैं, पर खेल परिस्थितियों में छोटे अंतर संभव हैं।

वास्तव में कौन-से क्रिकेट नियम काम आते हैं?
शुरुआती दर्शक के लिए सबसे उपयोगी नियम वे हैं जो स्कोर, विकेट और मैच परिणाम को सीधे बदलते हैं। इनमें वैध गेंद की पहचान, बल्लेबाजों का क्रीज पर पहुंचना, विकेट के प्रकार, अतिरिक्त रन, पावरप्ले और लक्ष्य की गणना शामिल हैं। पहले इन नियमों को सीखें; दुर्लभ नियमों को बाद के लिए छोड़ना अधिक प्रभावी है।
रन कैसे बनते और गिने जाते हैं?
रन बल्लेबाजों के दौड़ने, चौके और छक्के से बनते हैं; नो-बॉल, वाइड, बाई और लेग-बाई अतिरिक्त रन की श्रेणियां हैं। चौका जमीन छूते हुए सीमा तक पहुंचने पर चार रन देता है, जबकि छक्का बिना जमीन छुए सीमा पार करने पर छह रन देता है। बाई बल्ले से संपर्क के बिना और लेग-बाई शरीर या पैड से संपर्क के बाद मिल सकती है, यदि अंपायर परिस्थितियों को वैध माने।
स्कोरकार्ड में बल्लेबाज के निजी रन और टीम के अतिरिक्त रन अलग-अलग दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए 142 रन की टीम पारी में बल्लेबाजों के कुल 130 रन और अतिरिक्त 12 रन हो सकते हैं। शुरुआती लोग अक्सर अतिरिक्त रन को बल्लेबाज के खाते में जोड़ देते हैं, जिससे खिलाड़ी के प्रदर्शन का गलत आकलन होता है। रन, बाई और लेग-बाई समझने की मार्गदर्शिका
विकेट के प्रमुख प्रकार कौन-से हैं?
क्रिकेट में बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू, रन आउट, स्टंपिंग, हिट-विकेट, रिटायर्ड आउट और क्षेत्ररक्षण में बाधा जैसे आउट होने के तरीके मिलते हैं। व्यवहार में शुरुआती दर्शक पहले पांच को पहचानना सीखें। बोल्ड में गेंद स्टंप गिराती है, कैच में बल्ले से लगी गेंद जमीन छूने से पहले पकड़ी जाती है, और एलबीडब्ल्यू में गेंद बल्ले से पहले पैड पर लगकर विकेट को प्रभावित कर सकती है।
एलबीडब्ल्यू के लिए गेंद का पिच होना, बल्ले से पहले पैड पर लगना और विकेट की दिशा में जाना महत्वपूर्ण है; ऑफ-स्टंप के बाहर पिच होने जैसी परिस्थितियां भी निर्णय बदल सकती हैं। रन आउट में बल्लेबाज क्रीज के बाहर होता है और गेंद से संबंधित कार्रवाई के दौरान विकेट गिरता है। स्टंपिंग सामान्यतः विकेटकीपर द्वारा होती है, जब बल्लेबाज शॉट खेलने की स्थिति में क्रीज से बाहर हो और रन लेने का प्रयास न कर रहा हो। इतने नियम हैं कि केवल अपील देखकर निष्कर्ष निकालना समझदारी नहीं।
ओवर, पावरप्ले और लक्ष्य कैसे पढ़ें?
एक सामान्य ओवर में छह वैध गेंदें होती हैं। नो-बॉल और वाइड ओवर में अतिरिक्त गेंद जोड़ते हैं, इसलिए स्कोरबोर्ड का “ओवर” प्रदर्शन 5.3 या 17.5 जैसा दिख सकता है; इसका अर्थ क्रमशः छह में से पांच और छह में से पांच वैध गेंदें पूरी होना है, दशमलव संख्या नहीं। यह एक साधारण लेकिन महत्वपूर्ण सूचना है जिसे नए दर्शक अक्सर गलत पढ़ते हैं।
टी20 में 20 ओवर और एकदिवसीय क्रिकेट में 50 ओवर प्रति टीम होते हैं, हालांकि बारिश या प्रतियोगिता नियमों से ओवर घट सकते हैं। पावरप्ले में क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध लागू होते हैं, जिससे बल्लेबाजों को शुरुआती ओवरों में आक्रामक विकल्प मिलते हैं। लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को जीत के लिए निर्धारित लक्ष्य से एक रन अधिक चाहिए; बराबरी पर टाई हो सकती है, जिसके बाद सुपर ओवर या अन्य प्रतियोगिता नियम लागू हो सकते हैं। Source: आईसीसी पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय खेल परिस्थितियां
नियमों को वास्तविक स्कोरकार्ड में जोड़कर देखना सीखें, क्योंकि वहां “आरआर”, “विकेट”, “ओवर” और “आवश्यक रन रेट” साथ दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए 120 गेंदों में 150 रन का लक्ष्य और 60 गेंदों में 80 रन की जरूरत हो, तो आवश्यक रन रेट 8 रन प्रति ओवर होगा। यह गणना केवल अनुमान नहीं, रणनीति का आधार है; कप्तान को विकेट बचाने और रन गति बढ़ाने के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
अब स्कोरकार्ड पढ़ने का एक व्यवस्थित तरीका अपनाइए।
- पहले प्रारूप और दोनों टीमों की ओवर सीमा देखें।
- फिर टीम का कुल स्कोर, विकेट और पूरे किए गए ओवर पढ़ें।
- अतिरिक्त रन को बल्लेबाज के निजी रन से अलग रखें।
- लक्ष्य का पीछा करते समय आवश्यक रन और शेष गेंदों की गणना करें।
- विवादित निर्णय में अंपायर संकेत, समीक्षा और आधिकारिक स्कोरकार्ड मिलाएं।
प्रसारण में दिखने वाला रन रेट कई बार अगले ओवर की पहली गेंद के बाद बदल जाता है, इसलिए 19.5 ओवर पर बने आंकड़े को पारी समाप्त मानना भूल है। इसी तरह बारिश वाले मैच में डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धति लक्ष्य बदल सकती है; संशोधित लक्ष्य प्रसारण पर अलग से दिखाया जाता है। डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धति सरल भाषा में
इस व्यावहारिक पद्धति को मैच देखते समय लागू करना हो तो यह संदर्भ सुरक्षित रखें।
किन बातों को नजरअंदाज करना चाहिए?
शुरुआती दर्शक को वायरल नियम-सूचियों, अधूरी सोशल मीडिया व्याख्याओं और हर अपील को आउट मानने की आदत को नजरअंदाज करना चाहिए। क्रिकेट के निर्णय प्रतियोगिता की आधिकारिक खेल परिस्थितियों, अंपायर संकेत और स्वीकृत स्कोरकार्ड पर आधारित होते हैं। एक ही घटना टेस्ट क्रिकेट, आईपीएल और स्थानीय मैच में अलग प्रक्रिया पा सकती है।
“गेंद स्टंप से टकराती तो जरूर आउट होता” जैसे काल्पनिक तर्क उपयोगी नहीं हैं, क्योंकि एलबीडब्ल्यू में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट की दिशा सभी देखी जाती हैं। इसी तरह “फ्री हिट पर बल्लेबाज आउट नहीं हो सकता” कहना भी गलत है; रन आउट, स्टंपिंग और हिट-विकेट जैसी स्थितियां नियमों के अनुसार संभव हो सकती हैं। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के नियमों में परिस्थिति-विशिष्ट अपवादों को अलग-अलग परिभाषित किया गया है। आधिकारिक दस्तावेज में स्पष्ट कहा गया है, “अंपायर का निर्णय अंतिम होता है,” हालांकि उपलब्ध समीक्षा प्रक्रिया में उसे चुनौती दी जा सकती है।
सट्टेबाजी या अनुमान को नियमों की समझ का विकल्प न बनाएं। क्रिकेट मैच का परिणाम निश्चित नहीं होता, और किसी खिलाड़ी के पिछले आंकड़े भविष्य की गारंटी नहीं देते। मैच डे क्रिकेट का उद्देश्य खेल की समीक्षा, खिलाड़ी आंकड़ों और रणनीति को समझाना है; जिम्मेदार दर्शक पहले नियम, प्रतियोगिता की शर्तें और विश्वसनीय स्रोत जांचता है। उम्र, स्थानीय कानून और वित्तीय जोखिम से जुड़े नियमों को कभी अनदेखा न करें, isn’t that the sensible approach?
इन चार संकेतों को देखकर किसी ऑनलाइन व्याख्या की विश्वसनीयता जांचें:
- क्या स्रोत आईसीसी, मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब, बीसीसीआई या आधिकारिक प्रतियोगिता है?
- क्या वह टेस्ट, एकदिवसीय या टी20 प्रारूप स्पष्ट करता है?
- क्या वह नो-बॉल, वाइड और अतिरिक्त रन की गणना अलग बताता है?
- क्या निर्णय के साथ अंपायर संकेत या आधिकारिक खेल परिस्थिति दी गई है?

निष्कर्ष: क्या शुरुआती लोग क्रिकेट जल्दी समझ सकते हैं?
हां, शुरुआती लोग चार आधारों—वैध गेंद, रन, विकेट और ओवर—से क्रिकेट जल्दी समझ सकते हैं। इसके बाद नो-बॉल, वाइड, फ्री हिट, पावरप्ले, डीआरएस और संशोधित लक्ष्य जैसे नियम जोड़ें। पहले एक पूरा ओवर ध्यान से देखें, फिर स्कोरकार्ड में गेंद-दर-गेंद घटनाओं का मिलान करें; यह तरीका केवल हाइलाइट देखने से कहीं अधिक विश्वसनीय है।
आईसीसी, मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब, बीसीसीआई और आधिकारिक प्रतियोगिता पृष्ठों को प्राथमिक स्रोत मानें। विराट कोहली, रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह और अन्य खिलाड़ियों के आंकड़े पढ़ते समय प्रारूप, पारी, स्ट्राइक रेट और गेंदबाजी इकॉनमी अलग-अलग देखें। 2026 में तकनीक और समीक्षा प्रक्रियाएं क्रिकेट को अधिक पारदर्शी बना सकती हैं, लेकिन नियमों की मूल संरचना वही रहेगी। अगली बार मैच देखते हुए पहले ओवर, स्कोर, विकेट और आवश्यक रन रेट लिखिए; फिर हर विवादित घटना को नियम से मिलाइए।
अपने अगले मैच के लिए यह सीखने की पद्धति अपनाइए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्रिकेट में एक ओवर में कितनी गेंदें होती हैं?
उत्तर: एक सामान्य ओवर में छह वैध गेंदें होती हैं। नो-बॉल और वाइड वैध गेंद नहीं गिनी जातीं, इसलिए उनके बाद अतिरिक्त गेंद डाली जाती है। इसी कारण स्कोरकार्ड पर 5.4 या 17.2 जैसे अंक दिखाई दे सकते हैं; यहां दशमलव गणित नहीं, वैध गेंदों की गिनती दर्शाता है। स्थानीय क्रिकेट में कुछ नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए प्रतियोगिता की खेल परिस्थितियां भी जांचें।
प्रश्न: क्रिकेट में नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?
उत्तर: नो-बॉल गेंदबाज या क्षेत्ररक्षण से जुड़ी अवैध गेंद है, जबकि वाइड बल्लेबाज की सामान्य पहुंच से बाहर डाली गई गेंद होती है। दोनों से कम-से-कम एक अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर की वैध छह गेंदों में नहीं गिनी जाती। सीमित ओवर क्रिकेट में नो-बॉल के बाद फ्री हिट मिल सकती है, लेकिन वाइड के बाद सामान्यतः फ्री हिट नहीं मिलती।
प्रश्न: क्रिकेट में रन आउट कैसे होता है?
उत्तर: रन आउट तब होता है जब बल्लेबाज क्रीज से बाहर हो और क्षेत्ररक्षक गेंद से संबंधित कार्रवाई में विकेट गिरा दे। बल्लेबाज का बल्ला या शरीर क्रीज के पीछे जमीन पर होना चाहिए; केवल हवा में रखा बल्ला सुरक्षित नहीं माना जाता। निर्णय में गेंद विकेट से कब जुड़ी, बल्लेबाज का कौन-सा हिस्सा क्रीज के भीतर था और विकेट किस छोर पर गिरा, ये तीनों बातें देखी जाती हैं।
प्रश्न: डीआरएस क्या है और इसका उपयोग कैसे होता है?
उत्तर: डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली अंपायर के निर्णय की तकनीकी समीक्षा करने की प्रक्रिया है। कप्तान निर्धारित समय सीमा में समीक्षा मांगता है, फिर तीसरा अंपायर उपलब्ध वीडियो, अल्ट्राएज या बॉल-ट्रैकिंग जैसी तकनीक देखता है। हर मैच में डीआरएस उपलब्ध नहीं होता और समीक्षाओं की संख्या प्रारूप तथा प्रतियोगिता के नियमों पर निर्भर करती है, इसलिए आईपीएल और आईसीसी मैचों की शर्तें पहले पढ़ें।
प्रश्न: क्रिकेट सीखने के लिए क्या महंगा उपकरण चाहिए?
उत्तर: केवल नियम समझने के लिए किसी महंगे उपकरण की जरूरत नहीं है। लाइव स्कोरकार्ड, आधिकारिक नियम पृष्ठ और एक मैच की गेंद-दर-गेंद टिप्पणी पर्याप्त शुरुआती साधन हैं। खेलने के लिए बल्ला, गेंद, पैड, दस्ताने और हेलमेट चाहिए, लेकिन शुरुआती अभ्यास में स्थानीय क्लब का साझा उपकरण उपयोग किया जा सकता है। सुरक्षा के लिए तेज गेंदबाजी के सामने प्रमाणित हेलमेट और उचित पैड अनिवार्य मानें।
प्रश्न: बारिश के बाद क्रिकेट मैच का लक्ष्य क्यों बदल जाता है?
उत्तर: बारिश से ओवर कम होने पर डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धति उपलब्ध संसाधनों के आधार पर नया लक्ष्य तय करती है। इसमें बचे हुए ओवर और खोए हुए विकेट को ध्यान में रखा जाता है, इसलिए केवल पहले लक्ष्य को शेष गेंदों से घटाना सही नहीं होता। आधिकारिक स्कोरबोर्ड संशोधित लक्ष्य और जीत के लिए आवश्यक रन दिखाता है; दर्शक को प्रसारण की नई घोषणा का इंतजार करना चाहिए।
प्रश्न: क्रिकेट मैच देखते समय सबसे पहले क्या देखना चाहिए?
उत्तर: सबसे पहले प्रारूप, ओवर सीमा, टीम का स्कोर, विकेट और पूरे किए गए ओवर देखें। इसके बाद अतिरिक्त रन, आवश्यक रन रेट और गेंदबाज के बचे हुए ओवर पर ध्यान दें। विवादित घटना होने पर कमेंट्री के बजाय अंपायर संकेत और आधिकारिक स्कोरकार्ड जांचें। यह क्रम शुरुआती दर्शक को परिणाम, रणनीति और नियम—तीनों समझने में मदद करता है।
क्रिकेट नियमों की यह समझ उपयोगी लगी हो तो आगे की रणनीति और खिलाड़ी आंकड़ों को भी ध्यान से पढ़ें।